You are using an outdated browser. For a faster, safer browsing experience, upgrade for free today.

माघ और फाल्गुन मास को लेकर प्रत्येक वर्ष पंचांग के समय लोगों में भ्रम देखने को मिलता है। विशेष रूप से यह धारणा प्रचलित हो गई है कि पूर्णिमा के बाद मास बदल जाता है, जबकि हमारे हिन्दू/सनातन धर्म में यह मान्यता शास्त्रसम्मत नहीं है। हमारे सनातन धर्म में पंचांग की गणना चंद्रमा की गति पर आधारित होती है, जिसमें मास, पक्ष और तिथि का निर्धारण स्पष्ट नियमों के अनुसार किया जाता है।

हमारे सनातन शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के बाद केवल पक्ष बदलता है, मास नहीं बदलता। मास का परिवर्तन अमावस्या के पश्चात ही होता है। यही नियम धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, मुहूर्तचिन्तामणि और सूर्य सिद्धांत जैसे ग्रंथों में स्वीकार किया गया है। इसलिए यह कहना कि पूर्णिमा के बाद मास बदल जाता है, हमारी सनातन परंपरा के अनुरूप सही नहीं है

हमारे हिन्दू/सनातन धर्म में अमावस्या से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा से अमावस्या तक कृष्ण पक्ष माना जाता है। पूर्णिमा आने पर शुक्ल पक्ष समाप्त होकर कृष्ण पक्ष आरंभ होता है, परंतु मास वही रहता है। जब अमावस्या समाप्त होती है, तभी नया मास प्रारंभ होता है। इसी कारण माघ पूर्णिमा के बाद भी माघ मास ही चलता है और फाल्गुन मास माघ अमावस्या के पश्चात ही आरंभ होता है।

अब प्रश्न उठता है कि पंचांग में कई बार तारीख़ के ऊपर या नीचे “फाल्गुन” क्यों लिखा दिखाई देता है। हमारे सनातन पंचांग में दिन की तिथि के साथ-साथ रात में होने वाले तिथि परिवर्तन की सूचना भी दी जाती है। कई बार तिथि और मास का परिवर्तन रात्रि में होता है, इसलिए पंचांग में यह उल्लेख किया जाता है। इसका अर्थ यह नहीं होता कि पूरा दिन फाल्गुन मास का हो गया, बल्कि यह केवल रात्रिकालीन तिथि की जानकारी होती है।

हमारे हिन्दू/सनातन धर्म में पूजा-पाठ, व्रत और कर्मकाण्ड के लिए दिन में चल रहा मास ही मान्य होता है। रात में लिखी गई तिथि केवल सूचना के लिए होती है। इसी अंतर को न समझ पाने के कारण लोगों में माघ-फाल्गुन मास को लेकर भ्रम उत्पन्न होता है।

हमारी सनातन परंपरा के अनुसार यदि 2026 का उदाहरण लें, तो 02 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा है। इसके बाद 03 फरवरी से 16 फरवरी 2026 तक माघ मास का कृष्ण पक्ष चलता है। 16 फरवरी 2026 को माघ अमावस्या होती है और इसके पश्चात 17 फरवरी 2026 से फाल्गुन मास का आरंभ होता है। अतः जब तक माघ अमावस्या समाप्त नहीं होती, तब तक मास माघ ही माना जाता है।

हमारे हिन्दू/सनातन धर्म का शास्त्रसम्मत निष्कर्ष यही है कि पूर्णिमा से पक्ष बदलता है, अमावस्या से मास बदलता है। पंचांग में लिखा “फाल्गुन” कई बार रात्रिकालीन तिथि की सूचना होता है, न कि पूरे दिन का मास। पूजा-पाठ और व्रत में सदैव दिन का मास ही मान्य होता है।